बंगाल हिंसा का ज्वाबदार कोन ?? | पश्चिम बंगाल में हिंसा जारी, 17 हुई मृतकों की संख्या

जब हम पश्चिम बंगाल की बात करते है तब वहा के अनेक फामस मिठाइया ओर अलग पोशाक की बाते होती है । वाह पे महान लोग जेसे की रवीद्रनाथ टागोर जेसे लोगो का जनम हुआ है। वह हिन्दू-मुस्लिम एक होकर रहते है ।

पश्चिम बंगाल हिंसा

पर आज बात पश्चिम बंगाल की अलग है लोग पार्टियो को जीतने के लिए आपने आसपास के लोगो की हत्या ओर उनके घर जलाए जा रहे है। वहा पर कोई पुलिस ओर सरकार का डर लोगो मे रहा नहीं है। पश्चिम बंगाल मे देश की आजादी के बाद वह पर अनेक लोगो की ह्त्याये होती रही है। उन सब मे कोई बड़े नेता की हत्या नहीं होती पर उसका भोग आम जनता बनती है ओर वह की पुलिस पोलिटिक दबाव मे कोई कारवाही नहीं करती है।

पश्चिम बंगाल हिंसा

जब कोरोना होने के बावजुड़ इलैक्शन होने वाले थे तब लोगो मे एक भाय का महोल बन गया था। आज पश्चिम बंगाल मे जो लोग मर रहे है उनके गुनेगार वो पॉलिटिकल पार्टिया है। पश्चिम बंगाल मे लोग कोरोना मे आफ्ना दमतोड़ रहे है ओर कुछ मेडिकल सुविधा न मिल पाने की वजह से मर रही है।

पश्चिम बंगाल मे आज इतने हिंसा हो रही हे की अब तक 16 लोगो की मोत हो गई है उसमे बीजेपी ओर टीएमसी के लोग शामिल है। पर वह की पुलिस ओर प्रशाशन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे है। आप को बता दे की टीएमसी चुनाव जीतने के बाद बंगाल मे हिंसा ने बड़ा रूप धरण कर लिया है। उसमे आमने सामने दोनों पार्टियो के लोग वह पर हिंसा फेला रहे है।

हिंसा पर कोन जीमेदार

जब इलैक्शन खतम हा गए थे तब EC को आपने पावर का यूस कर के लोगो की भीड़ को होने नहीं देना था पर कोई ने कड़े नियम नहीं लगाए। टीएमसी की जीत के बाद ममता बेनर्जी ने बोला था की कोई आपने घर से नहीं निकले गा बाहर कोरोना है पर वहा की पुलिस ने कोई कदम नहीं आपनाए।

पश्चिम बंगाल हिंसा

उस हिंसा मे 7 से ज्यादा बीजेपी ओर अलग पार्टी के लोगो की जान चली गई है। ममता ने सभी मरने वाले लोगो को 2-2 लाख देने का वादा किया है। ओर बीजेपी के बड़े नेता बंगाल मे जाकर बीजेपी के मरे कार्यकरता के परिवार के लोगो को मिलकर हर संभव मदद कर रहे है। बंगाल मे ये हिंसा की प्रोब्लेम हमेशा के लिए बंद हो जाए इस लिए पुलिस को सकत कदम उठाने पड़ेगे।

राजनीतिक पर्यवेक्षक पार्थ प्रतिम विश्वास कहते हैं, “हिंसा की ज्यादातर घटनाएं ग्रामीण इलाकों में हुई हैं. वहां स्थानीय लोगों की आपसी तनातनी इसकी प्रमुख वजह हो सकती है. यह संभव है कि शीर्ष नेताओं ने इसका समर्थन नहीं किया हो. लेकिन अब इन मामलों को अपने हित में भुनाने की कवायद तेज हो गई है. बंगाल में हम पहले भी फेक वीडियो और तस्वीरों के जरिए सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश देख चुके हैं. प्रशासन को ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिए कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.”

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