विक्रम बेताल की कहानियां | betal pacchisi in hindi

हेलो फ्रेंड आपको आज विक्रम और बेताल(vikarm बेताल story) की सबसे अच्छी कहानिया आपके लिए लाये हे। जब विक्रम और बेताल शो की शुरुवात 1985 में हुई थी और दूरदर्शन चेंनेल पर उसका प्रसारण होता था 19 दसक की सबसे अच्छा शो मन जाता है।

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चार पढ़े लिखे मूर्ख

कुसुमपुर नगर में एक राजा राज्य करता था। उसके नगर में एक ब्राह्मण था, जिसके चार बेटे थे। लड़कों के सयाने होने पर ब्राह्मण मर गया और ब्राह्मणी उसके साथ सती हो गयी। उनके रिश्तेदारों ने उनका धन छीन लिया। वे चारों भाई नाना के यहाँ चले गये।

लेकिन कुछ दिन बाद वहाँ भी उनके साथ बुरा व्यवहार होने लगा। तब सबने मिलकर सोचा कि कोई विद्या सीखनी चाहिए।

यह सोच करके चारों चार दिशाओं में चल दिये। कुछ समय बाद वे विद्या सीखकर मिले।

एक ने कहा-“मैंने ऐसी विद्या सीखी है कि मैं मरे हुए प्राणी की हड्डियों पर मांस चढ़ा सकता हूँ।”

दूसरे ने कहा-“मैं उसके खाल और बाल पैदा कर सकता हूँ।”

तीसरे ने कहा- “मैं उसके सारे अंग बना सकता हूँ।”

चौथा बोला- “मैं उसमें जान डाल सकता हूँ।”

फिर वे अपनी विद्या की परीक्षा लेने जंगल में गये। वहाँ उन्हें एक मरे शेर की हड्डियाँ मिलीं। उन्होंने उसे बिना पहचाने ही उठा लिया तथा एकत्र करके ले आये।

एक ने उसमें माँस डाला, दूसरे ने खाल और बाल पैदा किये, तीसरे ने सारे अंग बनाये और चौथे ने उसमें प्राण डाल दिये और तब शेर जीवित हो उठा, वह भूखा था। उसने चारों को मार कर खा गया।

यह कथा सुनाकर बेताल बोला-“हे राजन विक्रम, बताओ कि उन चारों में शेर बनाने का अपराध किसने किया?”

राजा विक्रम ने कहा-“जिसने प्राण डाले उसने, क्योंकि बाकी तीन को यह पता ही नहीं था कि वे शेर बना रहे हैं। इसलिए उनका कोई दोष नहीं है।”

यह सुनकर बेताल बोला- राजन् तुमने मार्ग में न बोलने की शर्त तोड़ दी और वह फिर पेड़ पर जा लटका। राजा विक्रम फिर से बेताल को पकड़ने के लिए भागा।

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दोषी कौन

बनारस में देवस्वामी नाम का एक ब्राह्मण रहता था। उसके हरिदास नाम का पुत्र था। हरिदास की बड़ी सुन्दर पत्नी थी। नाम था लावण्यवती। एक दिन वे महल के ऊपर छत पर सो रहे थे कि आधी रात के समय एक गंधर्व-कुमार आकाश में घूमता हुआ उधर से निकला।

वह लावण्यवती के रूप पर मुग्ध होकर उसे उड़ाकर ले गया। जागने पर हरिदास ने देखा कि उसकी स्त्री नही है तो उसे बड़ा दुख हुआ और वह मरने को तैयार हो गया।

लोगों के समझाने पर वह मान तो गया; लेकिन यह सोचकर कि तीरथ करने से शायद पाप दूर हो जाय और स्त्री मिल जाय, वह घर से निकल पड़ा।

चलते-चलते वह किसी गाँव में एक ब्राह्मण के घर पहुँचा। उसे भूखा देख ब्राह्मणी ने उसे कटोरा भरकर खीर दे दी और तालाब के किनारे बैठकर खाने को कहा। जिससे हाथ-मुँह धोने को पानी भी मिल जाये और प्यास लगने पर प्यास भी बुझाया जा सके। हरिदास खीर लेकर एक पेड़ के नीचे आया और कटोरा वहाँ रखकर तालाब मे हाथ-मुँह धोने गया।

इसी बीच एक बाज किसी साँप को लेकर उसी पेड़ पर आ बैठा और जब वह उसे खाने लगा तो साँप के मुँह से ज़हर टपककर कटोरे में गिर गया। हरिदास को कुछ पता नहीं था।

वह उस खीर को खा गया। ज़हर का असर होने पर वह तड़पने लगा और दौड़ा-दौड़ा ब्राह्मणी के पास आकर बोला, “तूने मुझे जहर दे दिया है।” इतना कहने के बाद हरिदास मर गया।

पति ने यह देखा तो ब्राह्मणी को ब्रह्मघातिनी कहकर घर से निकाल दिया।

इतना कहकर बेताल बोला-“हे राजन् विक्रम! बताओ कि साँप, बाज, और ब्राह्मणी, इन तीनों में अपराधी कौन है?”

राजा विक्रम ने कहा-“कोई नहीं। साँप तो इसलिए नहीं क्योंकि वह शत्रु के वश में था। बाज इसलिए नहीं कि वह भूखा था। जो उसे मिल गया, उसी को वह खाने लगा। ब्राह्मणी इसलिए नहीं कि उसने अपना धर्म समझकर उसे खीर दी थी और अच्छी खीर दी थी। जो इन तीनों में से किसी को दोषी कहेगा, वह स्वयं दोषी होगा।

इसलिए अपराधी ब्राह्मणी का पति था जिसने बिना विचारे ब्राह्मणी को घर से निकाल दिया।” इतना सुनकर बेताल फिर पेड़ पर जा लटका और राजा को वहाँ जाकर उसे लाना पड़ा।

तीन अजूबे भाई

अंग देश के एक गाँव मे एक धनी ब्राह्मण रहता था। उसके तीन पुत्र थे। एक बार ब्राह्मण ने एक यज्ञ करना चाहा। उसके लिए एक समुद्री कछुए की जरूरत हुई। उसने तीनों भाइयों को कछुआ लाने को कहा। वे तीनों समुद्र पर पहुँचे। वहाँ उन्हें एक कछुआ मिल गया।

बड़े ने कहा- “मैं भोजनचंग हूँ, इसलिए कछुए को नहीं छुऊँगा।”

मझला बोला- “मैं नारीचंग हूँ, मैं नहीं ले जाऊँगा।”

सबसे छोटा बोला- “मैं शैयाचंग हूँ, सो मैं नहीं ले जाऊँगा।”

वे तीनों इस बहस में पड़ गये कि उनमें कौन बढ़कर है। जब वे आपस में इसका फैसला न कर सके तो राजा के पास पहुँचे।

राजा ने कहा- “आप लोग रुकें। मैं तीनों की अलग-अलग जाँच करूँगा।”

इसके बाद राजा ने बढ़िया भोजन तैयार कराया और तीनों खाने बैठे।

सबसे बड़े ने कहा- “मैं खाना नहीं खाऊँगा। इसमें मुर्दे की गन्ध आती है।” वह उठकर चला। राजा ने पता लगाया तो मालूम हुआ कि वह भोजन श्मशान के पास के खेत का बना था।

राजा ने कहा- “तुम सचमुच भोजनचंग हो, तुम्हें भोजन की पहचान है।”

रात के समय राजा ने एक सुन्दर स्त्री को मझले भाई के पास भेजा।

स्त्री जैसे ही वहाँ पहुँची कि मझले भाई ने कहा- “इसे हटाओ यहाँ से। इसके शरीर से बकरी की दूध की गंध आती है।”

राजा ने यह सुनकर पता लगाया तो मालूम हुआ कि वह स्त्री बचपन में बकरी के दूध पर पली थी।

राजा बड़ा खुश हुआ और बोला- “तुम सचमुच नारीचंग हो।”

इसके बाद तीसरे भाई की बारी आई- तीसरे भाई को सोने के लिए सात गद्दों का पलंग दिया। जैसे ही वह उस पर लेटा कि एकदम चीखकर उठ बैठा। लोगों ने देखा, उसकी पीठ पर एक लाल रेखा खींची थी। राजा को ख़बर मिली तो उसने बिछौने को दिखवाया। सात गद्दों के नीचे उसमें एक बाल निकला। उसी से उसकी पीठ पर लाल लकीर हो गयी थीं।

राजा को बड़ा अचरज हुआ उसने तीनों को एक-एक लाख अशर्फियाँ दीं। अब वे तीनों कछुए को ले जाना भूल गये, वहीं आनन्द से रहने लगे।

इतना कहकर बेताल बोला- “हे राजन विक्रम! तुम बताओ, उन तीनों में से बढ़कर कौन था?”

राजा विक्रम ने कहा- “मेरे विचार से सबसे बढ़कर शैयाचंग था, क्योंकि उसकी पीठ पर बाल का निशान दिखाई दिया और ढूँढ़ने पर बिस्तर में बाल पाया भी गया। बाकी दो के बारे में तो यह कहा जा सकता है कि उन्होंने किसी से पूछकर जान लिया होगा।”

इतना सुनते ही बेताल फिर पेड़ पर जा लटका। राजा लौटकर वहाँ गया और उसे लेकर लौटा तो उसने अगली कहानी कही।

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