{best 5}Motivation Kahani Hindi | Short Motivational Story In Hindi

This is the best motivational story in hindi for success, (short motivational stories in hindi with moral)

Friends, जीवन में प्रेरणादायक कहानियों (Motivational Story In Hindi) का  एक अलग ही महत्त्व है. जीवन में अक्सर ऐसे क्षण आते हैं, जब हम स्वयं को निराशा के भंवर में फंसा पाते हैं. ऐसे में किसी के बोले गए प्रेरक शब्द या कहीं लिखे प्रेरक वाक्य या फिर प्रेरणादायक कहानियाँ (Inspirational Story In Hindi) हमें निराशा के उस भंवर से बाहर निकालकर नए जोश का संचार करती हैं. 

Short Motivational Story In Hindi

Short Motivational Story In Hindi

कीमती पत्थर

Motivation Kahani Hindi

-एक युवक कविताएँ लिखता था, लेकिन उसके इस गुण का कोई मूल्य नहीं समझता था। घरवाले भी उसे ताना मारते रहते कि तुम किसी काम के नहीं, बस कागज काले करते रहते हो। उसके अन्दर हीन-भावना घर कर गयी| उसने एक जौहरी मित्र को अपनी यह व्यथा बतायी| जौहरी ने उसे एक पत्थर देते हुए कहा – जरा मेरा एक काम कर दो।

-यह एक कीमती पत्थर है। कई तरह के लोगो से इसकी कीमत का पता लगाओ, बस इसे बेचना मत। युवक पत्थर लेकर चला गया| वह पहले एक कबाड़ी वाले के पास गया। कबाड़ी वाला बोला – पांच रुपये में मुझे ये पत्थर दे दो।

-फिर वह सब्जी वाले के पास गया। उसने कहा तुम एक किलो आलू के बदले यह पत्थर दे दो, इसे मै बाट की तरह इस्तेमाल कर लूँगा। युवक मूर्तिकार के पास गया| मूर्तिकार ने कहा – इस पत्थर से मै मूर्ति बना सकता हूँ, तुम यह मुझे एक हजार में दे दो। आख़िरकार युवक वह पत्थर लेकर रत्नों के विशेषज्ञ के पास गया। उसने पत्थर को परखकर बताया –

-यह पत्थर बेशकीमती हीरा है जिसे तराशा नहीं गया। करोड़ो रुपये भी इसके लिए कम होंगे। युवक जब तक अपने जौहरी मित्र के पास आया, तब तक उसके अन्दर से हीन भावना गायब हो चुकी थी। और उसे एक सन्देश मिल चुका था।

मोरल(moral) : हमारा जीवन बेशकीमती है, बस उसे विशेषज्ञता के साथ परखकर उचित जगह पर उपयोग करने की आवश्यकता है|

ज्ञानी पुरुष और निंदा

Short Motivational Story In Hindi

-एक व्यापारी एक नया व्यवसाय शुरू करने जा रहा था लेकिन आर्थिक रूप से मजबूत ना होने के कारण उसे एक हिस्सेदार की जरुरत थी| कुछ ही दिनों में उसे एक अनजान आदमी मिला और वह हिस्स्सेदार बनने को तैयार हो गया|

-व्यापारी को उसके बारे में ज्यादा कुछ मालुम नहीं था| अत: पहले वह हिस्सेदार बनाने से डर रहा था किन्तु थोड़ी पूछताछ करने के बाद उसने उस आदमी के बारें में विचार करना शुरू किया|

-एक दो दिन बीतने के पश्चात् व्यापारी को उसका एक मित्र मिला जो की बहुत ज्ञानी पुरुष था| हाल समाचार पूछने के बाद व्यापारी ने उस आदमी के बारें में अपने मित्र को बताया और अपना हिस्सेदार बनाने के बारें में पूछा| उसका मित्र उस आदमी को पहले से ही जानता था जो की बहुत कपटी पुरुष था वह लोगो के साथ हिस्सेदारी करता फिर उन्हें धोखा देता था|

-चूँकि उसका मित्र एक ज्ञानी पुरुष था| अत: उसने सोचा दूसरों की निंदा नहीं करनी चाहिए और उसने व्यापारी से कहा -” वह एक ऐसा व्यक्ति है जो आसानी से तुम्हारा विश्वास जीत लेगा|”

-यह सुनने के बाद व्यापारी ने उस आदमी को अपना हिस्सेदार बना लिया| दोनों ने काफी दिन तक मेहनत की और बाद में जब मुनाफे की बात आयी तो वह पूरा माल लेकर चम्पत हो गया|

-इस पर व्यापारी को बहुत दुःख हुआ | वह अपने मित्र से मिला और उसने सारी बात बतायी और उसके ऊपर बहुत गुस्सा हुआ इस पर उसके मित्र ने कहा मैं ठहरा शास्त्रों का ज्ञाता मैं कैसे निंदा कर सकता हूँ | व्यापारी बोला- वाह मित्र ! तुम्हारे ज्ञान ने तो मेरी लुटिया डुबो दी|

मोरल(moral) : यदि आप के ज्ञान से किसी का अहित होता है तो किसी काम का नहीं है |

चार मूर्ख

Short Motivational Story In Hindi

एक बार काशी नरेश ने अपने मंत्री को यह आदेश दिया कि जाओ और तीन दिन के भीतर चार मूर्खों को मेरे सामने पेश करो। यदि तुम ऐसा नहीं कर सके तो तुम्हारा सिर कलम कर दिया जाएगा।

पहले तो मंत्री जी थोड़े से घबराये लेकिन मरता क्या न करता। राजा का हुक्म जो था। ईश्वर का स्मरण कर मूर्खों की खोज में चल पड़े।

कुछ मील चलने के बाद उसने एक आदमी को देखा जो गदहे पर सवार था और सिर पर एक बड़ी सी गठरी उठाये हुए था। मंत्री को पहला मूर्ख मिल चुका था। मंत्री ने चैन की सांस ली।

कुछ और आगे बढ़ने पर दूसरा मूर्ख भी मिल गया। वह लोगों को लड्डू बाँट रहा था। पूछने पर पता चला कि शत्रु के साथ भाग गयी उसकी बीबी ने एक बेटे को जन्म दिया था जिसकी ख़ुशी में वह लड्डू बाँट रहा था।

दोनों मूर्खों को लेकर मंत्री राजा के पास पहुंचा।

राजा ने पूछा – ये तो दो ही हैं? तीसरा मूर्ख कहाँ है?

महाराज वह मैं हूँ। जो बिना सोचे समझे मूर्खों की खोज में निकल पड़ा। बिना कुछ सोचे समझे आपका हुक्म बजाने चल पड़ा।

और चौथा मूर्ख ?

क्षमा करें महाराज? वह आप हैं। जनता की भलाई और राज काज के काम के बदले आप मूर्खों की खोज को इतना जरुरी काम मानते हैं।

राजा की आँखें खुल गयी और उनसे मंत्री से क्षमा मांगी।

परिश्रम ही धन है

Short Motivational Story In Hindi

सुन्दरपुर गावं में एक किशन रहेता था । उसके चार बेटे थे । वे सभी आलसी और निक्कमे थे । जब किशन बुढा हुआ तो उसे बेटो की चिंता सताने लगी ।

एक बार किशान बहोत बीमार पड़ा । मृत्यु निकट देखकर उसने चार बेटो को अपने पास बुलाया । उसने उस चारो को कहा “ मैने बहुत सा धन अपने खेत में गाड रखा है । तुम लोग उसे निकल लेना ।” इतना कहते – कहते किशान के प्राण निकल गए ।

पिता का क्रिया-क्रम करने के बाद चारो भाइयो ने खेत की खुदाई शुरू कर दी । उन्होंने खेत का चप्पा-चप्पा खोद डाला, पर उन्हें कही धन नहीं मिला । उन्होंने पिता को खूब कोसा ।वर्षा रुतु आनेवाली थी । किशान के बेटों ने उस खेत में धान के बिज बो दिए । वर्षा का पानी पाकर पौधे खूब बढे । उन पर बड़ी-बड़ी बालें लगी । उस साल खेत में धान की बहोत अच्छी फसल हुई ।

चारों भाई बहुत खुश हुए । अब पिताकी बात का सही अर्थ उनकी समझ में आ गया । उन्होंने खेत की खुदाई करने में जो परिश्रम किया था, उसी से उन्हें अच्छी फसल के रूप में बहुत धन मिला था ।

इस प्रकार श्रम का महत्व समझने पर चारो भाई मन लगाकर खेती करने लगे ।

सिख(moral) : परिश्रम ही सच्चा धन है ।

ईमानदारी का फल

Short Motivational Story In Hindi

गोपाल एक गरीब लकडहारा था । वह रोज जंगल में जाकर लकडिया काटता था और शाम को उन्हें बाजार में बेच देता था । लकड़ियों को बेचने से जो पैसे मिलते उन्ही से उसके परिवार का गुजर-बसर होता था ।

एक दिन गोपाल जंगल में दूर तक निकल गया । वहाँ उसकी द्रष्टि नदी के किनारे एक बड़े पेड़ पर पड़ी । उसने सोचा की आज उसे बहोत सारी लकड़ियाँ मिल जाएँगी । वह अपनी कुल्हाड़ी लेकर उस पेड़ पर चढ़ गया । अभी उसने एक डाल काटना शरु ही किया था की अचानक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छुट गई और नदी में जा गिरी । गोपाल जटपट पेड़ से निचे उतरा और नदी में अपनी कुल्हाड़ी ढूंढने लगा । उसने बहोत कोशिश की, पर कुल्हाड़ी उसके हाथ न लगी । उदास होकर वह पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया ।

इतने में एक देवदूत वहां आ पहुंचा । उसने गोपाल से उसकी उदासी का कारण पुछा । गोपाल ने देवदूत को कुल्हाड़ी नदी में गिर जाने की बात बताई । देवदूत ने उसे धीरज बंधाते हुए कहा “घबराओ मत, मै तुम्हारी कुल्हाड़ी निकल दूंगा ।”

यह कहकर देवदूत ने नदी में डूबकी लगाई । वह सोने की कुल्हाड़ी लेकर बहार निकला । उसने गोपाल से पूछा “ क्या यही तुम्हारी कुल्हाड़ी है । ” गोपाल ने कहा, “ नहीं महाराज, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है । ” फिर दूसरी बार डूबकी लगाकर देवदूत ने चांदी की कुल्हाड़ी निकाली । तब भी लकडहारे ने इनकार करते हुए कहा, “ नहीं, यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है । ” देवदूत ने फिर डुबकी लगाई । इस बार उसने नदी से लोहे की कुल्हाड़ी निकाली । उस कुल्हाड़ी को देखते ही गोपाल ख़ुशी से चिल्ला उठा, “ हाँ महाराज, यही मेरी कुल्हाड़ी है । ”

गोपाल की इमानदारी पर देवदूत बहोत खुश हुआ । लोहे की कुल्हाड़ी के साथ-साथ सोने की और चांदी की कुल्हाड़िया भी देवदूत ने गोपाल को इनाम में दे दी । गोपाल ने देवदूत का बड़ा आभार मन ।

सीख : इमानदारी एक अच्छा गुण है । इमानदारी का फल मीठा होता है ।

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