Dadi Maa Ki Kahan | दादी मां की कहानियां हिंदी में

इस पोस्ट में हम दादी माँ की कहानियां(Dadi Maa Ki Kahan) लाये है इसे बचो को अच्छा ज्ञान और मोटिवेशन मिलता है हम आज बात करने वाले है 3 बेस्ट दादी माँ की कहानी हिंदी(Best 3 Dadima Ki Kahaniyan in Hindi) मे तो आप उसको पड़ना मत भूलिए।

Best 3 Dadima Ki Kahaniyan in Hindi

एक मेंढक की कहानी

एक बार एक अध्यापक बच्चों को कुछ सीखा रहे थे। उन्होंने एक छोटे बरतन में पानी भरा और उसमें एक मेंढक को डाल दिया। पानी में डालते ही मेंढक आराम से पानी में खेलने लगा। अब अध्यापक ने उस बर्तन को गैस पर रखा और नीचे से गर्म करना शुरू किया।

जैसे ही थोड़ा तापमान बढ़ा तो मेंढक ने तभी अपने शरीर के तापमान को उसी तरह से थोड़ा – थोड़ा करके एडजस्ट करने लगा। अब जैसे ही बर्तन का थोड़ा तापमान बढ़ता तो मेंढक अपने शरीर के तापमान को भी उसी तरह से एडजस्ट कर लेता और उसी बर्तन में मजे से पड़ा रहता।

धीरे धीरे तापमान बढ़ना शुरू हुआ, एक समय ऐसा भी आया जब पानी उबलने लगा और अब मेंढक की क्षमता जवाब देने लगी। अब बर्तन में रुके रहना संभव ना था। बस फिर क्या था मेंढक ने बर्तन से बाहर निकलने के लिए छलांग लगायी लेकिन अफ़सोस ऐसा हो ना सका।

मेंढक अपनी पूरी ताकत लगाने के बावजूद उस पानी से भरे बर्तन से नहीं निकल पा रहा था क्यूंकि अपने शरीर का तापमान adjust करने में ही वो सारी ताकत खो चुका था। कुछ ही देर में गर्म पानी में पड़े मेंढक ने प्राण त्याग दिए।

अब दादी ने बच्चों से पूछा कि मेंढक को किसने मारा तो कुछ बच्चों ने कहा– गर्म पानी ने…

लेकिन दादी ने बताया कि मेंढक को गर्म पानी ने नहीं मारा बल्कि वो खुद अपनी सोच से मरा है।

जब मेंढक को छलांग मारने की आवश्यकता थी उस समय तो वो तापमान को एडजस्ट करने में लगा रहता था उसने अपनी क्षमता का प्रयोग नहीं किया लेकिन जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया तब तक वह कमजोर हो चुका था।

तो बच्चो यही तो हम सब लोगों के जीवन की भी कहानी है। हम अपनी परिस्थितियों से हमेशा समझौता करने में लगे रहते हैं। हम परिस्थितियों से निकलने का प्रयास नहीं करते उनसे समझौता करना सीख लेते हैं और सारा जीवन ऐसे ही निकाल देते हैं और जब परिस्थितियां हमें बुरी तरह घेर लेती हैं तब हम पछताते हैं कि काश हमने भी समय पर छलांग मारी होती।

अच्छी बुरी हर तरह की परिस्थितियां इंसान के सामने आती हैं लेकिन आपको परिस्थितियों से समझौता नहीं करना है। बहुत सारे लोग बुरी परिस्थितियों को अपना भाग्य मानकर ही पूरा जीवन दुखों में काट देते हैं। बहुत अफ़सोस होता है कि लोग समय पर छलांग क्यों नहीं मारते।

शिक्षा/Moral:- अगर कोई इंसान आपकी मदद कर सकता है तो वो हैं आप खुद। आप ही वो इंसान है जो खुद को सबसे बेहतर तरीके से जानते हैं। खुद को मरने मत दीजिये अपने अंदर के जोश को ठंडा मत होने दीजिये। उठिए देखिये आपकी मंजिल आपका इंतजार कर रही है।

बातूनी कछुआ

एक बार एक समय पर कंबुग्रीव नामक कछुआ एक झील के पास रहता था। दो सारस पक्षी जो उसके दोस्त थे उसके साथ झील में रहते थे। एक बार गर्मियों में, झील सूखने लगी, और उसमें जानवरों के लिए थोड़ा सा पानी बचा था।

सारस ने कछुए को बताया कि दूसरे वन में एक दूसरी झील है जहाँ बहुत पानी है, उन्हें जीवित रहने के लिए वहां जाना चाहिए।

वे योजना के अनुसार कछुए के साथ वहां जाने के लिए तैयार हुए। उन्होंने एक छड़ी को लिया और कछुए को बिच में मुँह से पकड़कर रखने को कहा और कहा कि अपने मुंह को खोलना नहीं,चाहे कोई भी बात हो। कछुआ उनकी बात मान गया।

कछुए ने छड़ी के बिच को अपने दांतों से पकड़ा और दोनों सरसों ने छड़ी के दोनों कोने को अपने चोंच से पकड़ लिया।

रास्ते में गांवों के लोग कछुए को उड़ते हुए देख रहे थे और बहुत आश्चर्यचकित थे। उन दो पक्षियों के बारे में जमीन पर एक हंगामा सा मच गया था जो एक छड़ी की मदद से कछुए को ले जा रहे थे। सरसों की चेतावनी के बावजूद,

कछुआ ने अपना मुंह खोला और कहा-“यह सब हंगामा क्यों हो रहा है?”

ऐसा कहते ही कछुआ नीचे गिर गया और उसकी मौत ही गई।

शिक्षा/Moral:- जितना आवश्यकता हो उतना ही बोलना चाहिए। बेकार की बात ज्यादा करने से हानी स्वयं को ही होती है।

बच्चे और गुब्बारे वाला

एक बार एक गांव में मेला हो रहा था। मेले में बहुत सारे लोग अपने परिवार के साथ घूमने आए थे।

मेले में बहुत सारे मिठाईयों की दुकान, खिलौने, और गुब्बारे बेचने वाले भी थे। एक कोने में एक गुब्बारे वाला अपने साइकिल पर गुब्बारे बेच रहा था।

तभी उसके पास एक छोटा सा बच्चा आया और उससे पूछने लगा – गुब्बारे वाले यह जो लाल वाला गुब्बारा है क्या यह ऊपर उड़ेगा?

तभी उस गुब्बारे वाले ने उत्तर दिया – हां यह लाल वाला गुब्बारा ऊपर उठेगा।

उसी समय उस बच्चे ने दोबारा गुब्बारे वाले से प्रश्न किया – क्या यह नीला वाला गुब्बारा ऊपर उड़ेगा?

गुब्बारे वाले ने दोबारा उत्तर दिया – हां बच्चे यह गुब्बारा ऊपर उड़ेगा। उस बच्चे ने तीसरी बार फिर से प्रश्न किया – गुब्बारे वाले क्या यह हरा वाला गुब्बारा ऊपर हवा में उड़ेगा?

यह सुनकर उस गुब्बारे वाले ने हंसते हुए उस बच्चे को जवाब दिया – हां बच्चे यह सभी गुब्बारे हवा में उड़ेंगे।

बेटा, गुब्बारा हवा में जाएगा या नहीं यह उसके रंग और आकार पर निर्भर नहीं होता है बल्कि वह तो उसके अंदर में भरे हुए हवा या गैस पर निर्भर करता है।

शिक्षा/Moral:- इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि जिस प्रकार गुब्बारे के बाहर के रंग और आकार पर गुब्बारे का ऊपर उड़ना निर्भर नहीं होता उसी प्रकार हमारा भी ऊपर उठना या सफलता प्राप्त करना हमारे बाहरी रंग रूप, हमारे व्यक्तिमत्व पर, हमारी क्षमताओं पर, हमारी योग्यताओं पर निर्भर नहीं होता यह सब तो केवल गुब्बारे रंग है। हमारा ऊपर उठना या हमारी सफलता को छूना हमारे मनोभाव, धारणाओं, हमारी मनोदृष्टि पर निर्भर करते है।

दो सांपों की कहानी

एक बार एक राजा था जिसका नाम था देवशक्ति वह अपने बेटे से बहुत निराश था, जो बहुत कमजोर था। वह दिन व दिन दुबला और कमजोर होता जा रहा था। दूर के स्थानों से प्रसिद्ध चिकित्सक भी उसे ठीक नहीं कर पा रहे थे। क्योंकि उसके पेट में साँप था। उन्होंने सभी तरह के उपचारों की कोशिश की, लेकिन सभी व्यर्थ थे|

युवा राजकुमार भी अपने पिता को दुःखी देखकर बहुत निराश था। और वह अपने जीवन के साथ तंग आ गया था एक रात, वह महल के बाहर आया और दूसरे राज्य में चला गया। उसने एक मंदिर में रहना शुरू कर दिया और दयालु लोगों ने जो कुछ भी उसे दान दिया, वह वही खा लेता था।

इस नये देश पर एक राजा का शासन था, जिसकी दो जवान बेटियां थीं। वे अच्छे संस्कारों के साथ बड़ी हुईं थी। हर सुबह वे अपने पिता के आशीर्वाद के लिए अपने पिता के पैरों को प्रणाम करती थी|

बेटियों में से एक ने कहा-“हे पिताजी, आपके आशीर्वाद से हमें दुनिया के सभी सुख प्राप्त हैं|”

दूसरी बेटी ने कहा- “हे राजा, इंसान को सिर्फ अपने कार्यों का ही फल मिलता है।

दूसरी बेटी की टिप्पणी से राजा को बहुत गुस्सा आया|

एक दिन उसने अपने मंत्रियों को बुलाया और कहा- “वह उन फलों का आनंद उठाएं जो उसके कार्यों के लिए नियत हैं! इसे ले जाओ और इसका महल के बाहर किसी के भी साथ इसका विवाह कर दें, जो भी आपको महल के बाहर मिल जाए”

मंत्रियों ने ऐसा ही किया और जब उन्हें कोई नहीं मिला तो उन्होंने मंदिर में रह रहे युवा राजकुमार से उसका विवाह कर दिया।

राजकुमारी एक धार्मिक लड़की थी, और वह अपने पति को भगवान के रूप में मानती थी वह बहुत खुश थी और अपनी शादी से संतुष्ट थी। उन्होंने देश के एक अलग हिस्से की यात्रा करने का निर्णय लिया, क्योंकि मंदिर में घर बनाना अनुचित था।

रास्ते में, राजकुमार थक गया और एक पेड़ की छाया के नीचे आराम करने लगा क्योंकि वह हर दिन कमज़ोर हो रहा था और लंबी दूरी तक नहीं चल सकता था।

राजकुमारी ने पास के बाजार से कुछ भोजन लाने का फैसला किया। जब वह लौट कर आई, तो उसने अपने पति को तेजी से सोया देखा और आस पास के एक बिल से उभरते सांप को देखा और उसने अपने पति के मुंह से उभरते हुए एक और सांप को देखा। वह छिप कर यह सब देखने लगी.

एंथल के साँप ने दूसरे सांप से कहा-“तुम इस खूबसूरत राजकुमार को इतना दुःख क्यों दे रहे हो? इस तरह तुम खुद का जीवन खतरे में डाल रहे हो। अगर राजकुमार जीरा और सरसों का सूप पी लेगा। तो तुम निश्चित रूप से मरोगे!”

राजकुमार के मुंह के सांप ने कहा-“तुम सोने की दो घड़ों की रक्षा क्यों करते हैं, जिसकी तुमको कोई ज़रूरत नहीं है? और अपने जीवन को भी जोखिम में डाल रहे हो। अगर किसी ने गर्म पानी और तेल को डाला, तो तुम निश्चित रूप से मर जाओगे। उनकी बातों को सुनने के बाद, वे अपने-अपने स्थानों के अंदर चले गए, लेकिन राजकुमारी ने उनके रहस्यों को जान लिया था।

उसने उनकी बातों के अनुसार काम किया और जीरा और सरसों के सूप के साथ अपने पति को भोजन दिया। कुछ ही घंटों के भीतर, युवा राजकुमार ठीक होना शुरू हो गया और उसकी ताकत वापस आ गई। उसके बाद, उसने सांप के बिल में गर्म पानी और तेल डाला, और सोने के दो बर्तन खोदा जिसकी दूसरा सांप रक्षा कर रहा था। उसके बाद वह युवा राजकुमार ठीक हो गया और उनके पास दो बर्तन भर सोना भी हो गए| अब वे खुशी के साथ रहने लगे।

शिक्षा/Moral:- इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि जब आपके दुश्मन झगड़ा करते हैं, तो तब आप विजेता हैं।

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