Pari Ki Kahani Hindi Mein | Pariyo Ki Kahani

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यह सभी हिंदी कहानियां बहुत ध्यान पूर्वक लिखी गई हैं जिसमें आपको वह सभी महत्वपूर्ण बातें पढ़ने को मिलेंगे जिससे हम एक अच्छे समाज की स्थापना कर सकते हैं।

हिंदी कहानियां मोरल के साथ जो आपको नैतिक शिक्षा तो देगी ही परन्तु साथ ही साथ जीवन के महत्त्वपूर्ण व मूलभूत बातें भी सिखाएंगी।

Pariyo ki kahani

गुलाबी परी की कहानी

ख़ुशी को रात को सोने से पहले कहानी सुनने का बहुत शौक है। वह कक्षा चार में पढ़ती है।

वह अपनी माँ से कहती है- “माँ” आज रात मुझे कहानी सुनाओगी न!”

माँ कहती है- “हाँ बेटा! अभी कुछ देर रुको। मैं रसोई का काम ख़त्म करके जल्दी ही आती हूँ।”

अब ख़ुशी ने- जल्दी से नाईट सूट पहना और अपने पलंग पर आकर लेट गई।

थोड़ी देर में माँ का काम ख़त्म हुआ तो वो भी उसके पास आ कर लेट गईं|

माँ बोलीं- “हाँ! अब बताओ कौन सी कहानी सुनाऊँ आज?”

ख़ुशी बोली-“माँ, आज वो परियों वाली कहानी सुनाओ न,” ख़ुशी को परियों की कहानी सुनना बहुत पसंद है। वह हर तीसरे दिन कोई न कोई परियों वाली ही कहानी सुनना चाहती है।

माँ बोलीं-“अच्छा चलो, आज मैं तुम्हें गुलाबी परी की कहानी सुनाती हूँ,” माँ ने कहानी शुरू की –

“बहुत समय पहले की बात है, परीलोक में बहुत सारी परियाँ रहती थीं। उनमें से गुलाबी परी सबसे प्यारी थी। वह रानी परी की सबसे चहेती परी भी थी। गुलाबी परी यदि कोई इच्छा करती तो वह उसे ज़रूर पूरा करती।

एक दिन खेलते–खेलते गुलाबी परी के मन में आया कि क्यों न पृथ्वीलोक पर सैर के लिए जाया जाए। उसने पृथ्वीलोक और वहां के लोगों के बारे में बहुत सुना हुआ था। वे लोग कैसे रहते हैं, वह जानना चाहती थी। उसने अपनी यह इच्छा रानी परी के सामने रखी। पहले तो रानी परी ने ना-नुकुर किया फिर मान गई। आखिर वह गुलाबी परी की इच्छा को कैसे टाल सकती थी।

रानी परी ने कहा, “पर मेरी एक शर्त है। पृथ्वीलोक पर तुम सिर्फ रात में ही जा सकती हो। और सूरज की पहली किरण निकलने से पहले ही तुम्हें वापस आना होगा। सूरज की किरणें तुम्हारे ऊपर नहीं पड़नी चाहिए। नहीं तो तुम्हारे पंख पिघल जाएंगे और तुम वापस नहीं आ पाओगी। तुम्हें हमेशा के लिए मनुष्यों के साथ रहना पड़ेगा।”

गुलाबी परी ने जल्दी से कहा- “ठीक है!”वह तो पृथ्वीलोक पर जाने के नाम से ही उत्साहित थी।

रानी परी ने कहा- “लेकिन तुम अकेले नहीं जाओगी। तुम्हारे साथ तुम्हारी तीन और परी बहनें भी तुम्हारी सुरक्षा के लिए जाएंगी। सब्ज़ परी, नील परी और लाल परी,”।

गुलाबी परी और भी खुश हो गई। “ये सब तो मेरी सहेलियाँ हैं! अब तो और भी मज़ा आएगा। हम सब वहाँ जा कर मज़े करेंगे, किसी बाग़ में खेलेंगे और नृत्य करेंगे।” बाक़ी परियाँ भी बहुत खुश हो गईं, आखिर उनको भी पृथ्वीलोक पर जाने का मौका मिल रहा था। वे सब रात का बेसब्री से इंतज़ार करने लगीं।

जैसे ही पृथ्वीलोक पर अँधेरा छाया, चारों परियाँ तैयार हो गईं। रानी परी ने एक बार फिर से अपनी चेतावनी दोहराई, “याद रहे, सूरज की पहली किरण निकलने से पहले ही परीलोक वापस आना होगा।” फिर रानी माँ ने सभी परियों को आँखें बंद करने को कहा।

थोड़ी देर बाद जब चारों परियों ने आँखें खोलीं तो वे सब एक हरे भरे बाग़ में थीं। चारों तरफ सुन्दर-सुन्दर फूल खिले हुए थे। तितलियाँ फूलों पर मंडरा रहीं थीं। हवा में ठंडक थी। उन परियों को ये हरियाली इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने नाचना शुरू कर दिया। धीमा-धीमा संगीत न जाने कहाँ से आ रहा था।”

कहानी खत्म हुई और ख़ुशी को अपनी माँ कि गोद में ही कहानी सुनते – सुनते नीद आ गई|

नन्ही परी और छोटी रानी

विक्रमगढ़ नामक एक राज्य था जिसमे एक राजा राज्य करता था। विक्रमगढ़ के राजा की दो रानियाँ थीं। बड़ी रानी कम सुन्दर थी और छोटी रानी अत्यधिक सुन्दर थी जिसके के कारण राजा छोटी रानी को अधिक प्रेम करते थे। एक दिन छोटी रानी के कहने पर राजा बड़ी रानी पर बहुत नाराज़ हुआ। तो बड़ी रानी रोती हुई महल से जंगल की और चली गयी।

एक नदी के किनारे, अनार के पेड़ के नीचे बैठ कर वो ज़ोर ज़ोर से रो रही थी कि तभी एक नन्ही सी परी प्रकट हुई।

नन्ही सी परी ने रानी से उसके रोने का कारण पूछा- बड़ी रानी ने सब कुछ सच सच बता दिया।

तब नन्ही सी परी बोली- ” ठीक है, मैं जैसा कहती हूँ, वैसा ही करो, न ज़्यादा न कम। पहले इस नदी में तीन डुबकी लगाओ और फिर इस अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ो।” और ऐसा कह कर परी गायब हो गयी।

बड़ी रानी ने वैसा ही किया जैसा कि परी ने कहा था। जब रानी ने पहली डुबकी लगाई तो उसके शरीर का रंग और साफ़ हो गया, सौंदर्य और निखर गया। दूसरी डुबकी लगाने पर उसके शरीर में सुंदर कपड़े और ज़ेवर आ गये। तीसरी डुबकी लगाने पर रानी के सुंदर लंबे काले घने बाल आ गये। इस तरह रानी बहुत सुंदर लगने लगी।

नदी से बाहर निकल कर रानी ने परी के कहे अनुसार अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ा। उस अनार के सारे बीज सैनिक बन कर फूट आये और रानी के लिये एक तैयार पालकी में उसे बिठा कर राज्य में वापस ले गये।

राजमहल के बाहर शोर सुन कर राजा ने अपने मंत्री से पता करने को कहा कि क्या बात है। मंत्री ने आकर ख़बर दी कि बड़ी रानी का जुलूस निकला है।

राजा ने तब बड़ी रानी को महल में बुला कर सारी कहानी सुनी और पछताते हुये इस बार छोटी रानी को राज्य से बाहर निकल जाने का आदेश दिया।

छोटी रानी ने:- पहले ही परी की सारी कहानी सुन ली थी। वो भी राज्य से बाहर जा कर अनार के पेड़ के नीचे, नदी किनारे जा कर रोने लगी। पिछली बार जैसे ही इस बार भी परी प्रकट हुई। परी ने छोटी रानी से भी उसके रोने का कारण पूछा। छोटी रानी ने झूठ मूठ बड़ी रानी के ऊपर दोष लगाया और कहा कि उसे बड़ी रानी महल से बाहर निकाल दिया है।

तब नन्ही परी बोली- ” ठीक है, मैं जैसा कहती हूँ, वैसा ही करो, न ज़्यादा न कम। पहले इस नदी में तीन डुबकी लगाओ और फिर इस अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ो।” और ऐसा कह कर परी गायब हो गयी।

छोटी रानी ने ख़ुश हो कर नदी में डुबकी लगाई। जब रानी ने पहली डुबकी लगाई तो उसके शरीर का रंग और साफ़ हो गया, सौंदर्य और निखर आया। दूसरी डुबकी लगाने पर उसके शरीर पर सुंदर कपड़े और ज़ेवर आ गये। तीसरी डुबकी लगाने पर रानी के सुंदर लंबे काले घने बाल आ गये। इस तरह रानी बहुत सुंदर लगने लगी। जब छोटी रानी ने ये देखा तो उसे लगा कि अगर वो तीन डुबकी लगाने पर इतनी सुंदर बन सकती है, तो और डुबकिय़ाँ लगाने पर जाने कितनी सुंदर लगेगी।

इसलिये, उसने एक के बाद एक कई डुबकियाँ लगा लीं। मगर उसका ऐसा करने से रानी के शरीर के सारे कपड़े फटे पुराने हो गये, ज़ेवर गायब हो गये, सर से बाल चले गये और सारे शरीर पर दाग़ और मस्से दिखने लगी।

छोटी रानी ऐसा देख कर दहाड़े मार मार कर रोने लगी। फिर वो नदी से बाहर आई और अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ा। उस अनार में से एक बड़ा सा साँप निकला और रानी को खा गया।

शिक्षा/Moral:- इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि दूसरों का कभी बुरा नहीं चाहना चाहिये, और लोभ नहीं करना चाहिये।

मोची और परियां

pari ki kahani in hindi

बहुत समय पहले की बात है एक शहर मेँ एक मोची रहता था वह बहुत ही अच्छे जूते बनाता था और उससे अपने घर का पालन पोषण करता था उसके घर मेँ उसकी एक पत्नी थी वह उस से बहुत प्रेम करता था किंतु दुर्भाग्यवश उस मोची का काम बहुत अच्छा नहीँ चलता था और वह अन्य मोचियों के मुकाबले गरीब होता जा रहा था

फिर एक दिन वह इतना दुखी हो गया कि उसने अपने पास बचे हुए जूते बनाने के अंतिम सामान को देखा और उसे अचे दाम पर बेचने की भावना लिए मेज पर रख दिया। उसकी पत्नी जो सब देख रही थी और एक सुंदर और बुद्धिमान ओरत थी।

उसने अपने पति को धैर्य रखने और साहस रखने के लिए समझाया। थोड़ी देर आराम कर ले वह मोची आराम करते करते थक कर सो गया उसे पता नहीँ चला|

वहाँ से कुछ परिया निकल रही थी जो उन की बात सुनकर उनकी इस अवस्था पर बहुत दुखी हुई। और उंहोन्ने निश्चय किया कि हमेँ उनकी मदद करनी चाहिए जब रात हो गई। मोची और उसकी पत्नी सोने चले गए तब परियो ने आकर एक जोड़ी सुंदर जूते बनाये और मेज पर रख कर चली गई जब सुबह मोची जागा तो उसे वह जूते दिखाई दिए और वह बहुत आश्चर्यचकित व खुश हुआ और मोची ने बाजार मेँ जाकर उन जूतो को बेचा उसे अच्छे पैसे मिले|

जिससे मोची ने नए जूते बनाने का सामान खरीदा और घर ले आया शाम होने पर वह जब सोने को चला गया तो फिर से परियो आई और उंहोन्ने मोची द्वारा लए हुए सामान से चार जोड़ी सुंदर जूते बनाए और सुबह जब मोची फिर से जागा तो बहुत खुश हुआ अब यह काम काफी समय तक चलता रहा रात मेँ मोची सामान लाकर रख देता था और सुबह जब सो कर उठता तो सारे झूते बनकर तैयार हो जाते थे|

फिर एक दिन मोची और उसकी पत्नी ने सोचा आखिर यह कौन करता है? क्यों न इन्हे देखा जाये ? और यह सोच कर वे दरवाजे के पीछे चिप गए और उन्होंने परियोँ को कुछ उपहार देने के लिए सुन्दर वस्त्रो को वह रख दिया।

फिर जब रात में परिया आई तो उन्होंने वह सुन्दर वस्त्रो को देखा वे उसे पहनकर बहुत खुश हुई और उन्होंने वे जूते बनाये और सदा के लिए वहाँ से चली गयी. मोची और उसकी पत्नी ने बुरे समय में साथ देने के लिए उनका धन्यवाद किया और ख़ुशी ख़ुशी रहने लगे।

स्नो वाइट और सात बौने

pari ki kahani

एक बार की बात है दूर प्रदेश मेँएक लड़की रहती थी उसका रंग हिमालय पर्वत की बर्फ की तरह सफ़ेद था और उसके बालोँ का रंग काजल के समान काला था और उसके ओठो का रंग गुलाब के समान गुलाबी था इसलिए उसका नाम स्नो वाइट था वह बहुत सुंदर लड़की थी उसकी सुंदरता विश्व प्रसिद्ध थी।

उसकी एक सौतेली माँ थी जो बहुत सुंदर थी वह स्नो वाइट से नफरत करती थी उसकी माँ जो कि एक सुंदर स्त्री के साथ साथ एक जादूगरनी भी थी। वह बहुत घमंडी थी उसके पास एक जादुई आईना था|

सौतेली माँ रोज उस से पूछा करती थी कि- ” बता आईने इस जगत मेँ सबसे सुंदर कौन है। ”

आईना कहता- ” रानी आप से सुंदर इस जगत कोई नहीँ है आप सबसे सुंदर रानी है। ”

आईने की बात सुनकर रानी बहुत खुश होती थी परंतु एक दिन जब

रानी ने उस आईने से पूछा -” बता आईने इस जगत मेँ सबसे सुंदर कौन है तो वह आईना बोला रानी आप बहुत सुंदर है किंतु सबसे सुंदर इस जगत स्नो वाइट है। रानी ने जब ऐसा सुना तो वह तिलमिला कर बोली आईने तू होश में तो है।

आईने ने फिर से अपनी बात को दोहराया- ” रानी आप बहुत सुन्दर है किन्तु इस जगत में सबसे सुन्दर तो स्नो वाइट ही है। ”

यह सुनकर सौतेली माँ ने गुस्से में अपने सेनिको को आदेश दिया -” सेनिको … स्नो वाइट को पकड़ लो और जंगल में ले जाकर मार डालो। ” सेनिको ने ऐसा ही किया वे उसे राजमहल से जंगल ले आये किन्तु उन्हें उसपर दया आई और उन्होंने उसे जंगल में जिन्दा छोड़ दिया और महल वापस चले गए। स्नो वाइट को जंगल में भटकते हुए एक छोटा और सुन्दर घर दिखा वह उस घर में जा पहुंचीं। यह घर सात बौनों का था बौनों ने जब राजकुमारी की पूरी कहानी सुनी तो वह बोले स्नो वाइट अगर तुम चाहो तो हमारे साथ रह सकती हो। राजकुमारी ने बौनों का धन्यवाद किया और उनके साथ रहने लगी। बौने घर से बहार जाते तो राज कुमारी घर का सारा काम करती थी।

एक दिन रानी ने फिर से आईने से पूछा -” बताओ आईने सब से सुन्दर कौन है ?”

आइना बोला- रानी आप बहुत सुन्दर है मगर आपसे भी सुन्दर स्नो वाइट है। ”

रानी ने गुस्से में कहा- ” किन्तु वह तो मरचुकी है। ”

आइना बोला- ” नही वह जंगल में सात बौनों के साथ रहरही है। ” रानी ने मन ही मन सोचा इस बार में खुद उसे मारूंगी। और वह जंगल में एक बूढी सेब बचने वाली ओरत का भेस बदल कर बौने के घर पहुंची और स्नो वाइट से सेब खरीद ने के लिए कहने लगी।

राजकुमारी के माना करने पर बोली-” बस एक बार इसको चख तो लो ये बहुत मीठे है। ” और स्नो वाइट का देते हुए बोली। जैसे ही स्नो वाइट ने उसे खाया वह बेहोश होकर गिर गयी। रानी खुश होकर हसी और वापस महल आ गयी। िदहर जब बोन घर वापस आये तो उन्होंने उसे मृत समझ कर एक ताबूत में रख दिया और दुखी होने लगे तभी वहां एक राजकुमार आया उसने जब स्नो वाइट को देखा तो वह उसके रूप पर मोहित हो गया और उसने उसके कोमल ओठो को चुम लिया तभी वह सेब का टुकड़ा जो राजकुमारी के मुह में था वह बहार निकल गया। और राज कुमारी पहले की तरह स्वास्थ हो गयी।

रानी ने महल पहुंच कर फिर से आईने से पूछा तो आईने ने फिर से स्नो वाइट को सबसे सुन्दर बताया।

इस पर रानी ने गुस्से में आईने को फेकते हुए बोली -” ये नही हो सकता मेने उसे स्वयं मृत्यु दी है। यह आइना झूट बोलता है और उसने आईने का तोड़ दिया।

स्नो वाइट और राजकुमार ने आपस में विवाह कर लिया और वह उस राजकुमार के साथ महल को चली गयी।

सिंड्रेला

pari ki kahani

एक समय की बात है एक प्यारी सी लड़की थी जिसका नाम था सिंड्रेला वह जब छोटी थी तब उसकी माँ गुजर गयी और उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली। वह अब अपनी एक सौतेली माँ व दो सौतेली बहिनो के साथ रहती थी। उसकी सौतेली माँ उससे घर का सारा काम कराती थी उस पर अगर सिंड्रेला कुछ गलत करदे तो उसे खाना खाने को भी नही देती थी।

एक दिन उस राज्य के राज कुमार ने सभी नगर वासियो को नाच गाने के उत्सव पर आमंत्रित किया। यह सुन सिंड्रेला बहुत खुश हुई वह भी उस उत्सव में जाना चाहती थी। किन्तु जब उसकी सौतेली माँ को पता चला तो उसने सिंड्रेला को बहुत डाटा व मारा और घर का बहुत सा काम उससे करने को दिया जिससे वह उस उत्सव में न जा सके और वह अपनी दोना पुत्रियों के साथ उस उत्सव में चली गयी। सिंड्रेला बहुत देखि थी पर वह कर भी क्या सकती थी। उसने अपनी मरी हुई माँ को याद किया और रोने लगी। तभी एक तेज रौशनी के बीच एक सुन्दर सी परी आई

परी ने सिंड्रेला से कहा – “उठो बेटी में तुम्हारी माँ हू। में तुम्हे रोते हुए नही देख सकती। में तुम्हे उस उत्सव में लेजाने के लिए आई हू।”

यह सुन कर सिंड्रेला ने परी से कहा- “भला में वह कैसे जासकती हू। मेरे पास तो पहनने के लिए कपडे भी नही है।” तो परी ने अपनी जादुई छड़ी को घुमाया और सिंड्रेला को एक राजकुमारी के सामान सुन्दर वस्त्र पहना दिए जिसमे वह एक सुन्दर राजकुमारी ही लग रही थी और फिर पारी ने सिंड्रेला के जाने के लिए एक शाही बाघी को भी बुलाया|

सिंड्रेला को उसमे बैठा कर परी बोली – “सिंड्रेला एक बात याद रखना तुम्हे हर हाल में रात के बारह बजे से पहले घर लोटना होगा क्योकि रात के बारह बजते ही मेरा ये जादू ख़त्म हो जायेगा। ”

सिंड्रेला ने परी को – “हाँ कहा।” और उत्सव के लिए चल दी।

सिंड्रेला उस उतसव में सबसे सुन्दर और एक राजकुमारी लग रही थी राजकुमार केवल उसके साथ ही नाच रहा था। यह देख के उसकी सौतेली माँ व बहिनो को उससे जलन हो रही थी किन्तु वह उसे पहचान नही पाये थे वे उससे एक राजकुमारी ही समझ रहे थे।

इधर राजकुमार के साथ नाच करते करते उसे याद ही नही रहा और बारह बजगए। जब उसने घडी की आवाज सुनी तो वह वहां से भगति हुई निकल गयी किन्तु इस जल्द बाजी में उसके पाँव का एक जूता राजकुमार के पास ही रह गया। राजकुमार ने अपने सेनिको को आदेश दिया की नगर के सभी घरो की तलाशी ले और यह जूता जिसभी लड़की का होगा में उसी से शादी करूँगा।

ऐश आदेश मिलते ही सेनिको ने सभी घरो की तलाशी ली और फिर वे सिंड्रेला के घर भी जा पहुंचे। सिंड्रेला की बहिनो ने पूरी कोशिश की पर वह जूता उनके फिट नही आया और भिर सेनिको ने सिंड्रेला से भी जूता नापने को कहा और सब खुश हो गए वह जूता जो किसे के पेरो में नही आता था|

वह सिंड्रेला के पेरो में एकदम ठीक आगया था और फिर उसकी शादी राजकुमार से होगयी उसकी सौतेली माँ और बहिने अब उससे बहुत प्यार करती थी। सिंड्रेला अपने पति के साथ शुखी शुखी रहने लगी।

सोलहवे जन्मदिन पर

सोलहवे जन्मदिन पर

एक बार की बात है दूर परियो के देश मेँ एक राजा और रानी रहते थे उनके राज मेँ एक सुंदर परी ने जन्म लिया। राजा ने इस ख़ुशी के अवसर को खूब धूम धाम से मनाया और दूर दूर तक सभी परियोँ को भोजन पर आमंत्रित किया सभी परियो ने उस छोटी सी राजकुमारी को अनमोल तोहफे व खूब सारे आशीर्वाद दिए और कहा कि यह एक समझदार, सुंदर, सुशील और दयालु राजकुमारी बने।

तभी वहाँ एक बूढी दुष्ट पारी आई उसने राजकुमारी को श्राप दिया। वह गुस्से मेँ चिल्ला कर बोली – तेरे सोलहवे जन्मदिन पर तुझे एक सुई चुभेगी और तेरी मृत्यु हो जाएगी। यह सुन कर राजा रानी बहुत दुखी हुए। तभी वहाँ एक दूसरी अच्छी परी आई उसने राजा रानी से कहा आप परेशान ना हो। मै दुस्ट पारी श्राप ख़त्म तो नही कर सकती पर मैँ आपकी सहायता अवश्य करुंगी जब राजकुमारी के सुई चुभेगी तो वह मारेगी नही बल्कि बेहोश हो जाएगी और जब उससे सच प्यार करने वाला एक राजकुमार उसे चूमेगा तो वह पुन स्वस्थ हो जाएगी।

राजा और रानी राजकुमारी के भविष्य को लेकर चिंता मेँ रहने लगे उंहोन्ने अपने राज्य में सुइयों को प्रतिबंधित कर दिया और सुइयों को राज्य की सीमा से बहार कर दिया। और इस प्रकार कई साल बीत गए वह छोटी सी राजकुमारी अब एक सुंदर व समझदार राजकुमारी बन गई थी।

और फिर उसके चौदहवे जन्मदिन पर जब वह महल मेँ टहल रही थी तो उसे एक गुप्त कमरे का दरबाजा मिला। राजकुमारी उत्सुकता बस उस कमरे मेँ चली गई जब उसने कमरे मेँ देखा तो एक बुढ़िया चरखे पर सुई से काम कर रही थी

उस पर राजकुमारी ने आश्चर्य से पूछा -“यह क्या है?”

वह बूढ़ी औरत बोली- ” यह चरखा है राजकुमारी”

राजकुमारी ने कहा- “क्या मैँ इस पर काम कर सकती हू। ”

बूढ़ी औरत सुई को राजकुमारी की ओर देते हुए बोली- ” हाँ क्योँ नहीँ।”

और जैसे ही राजकुमारी न सुई को पकड़ा। बूढ़ी औरत का दिया हुआ श्राप सच हो गया और राजकुमारी बेहोश होकर गिर पड़ी राज्य मेँ दुख की लहर फैल गई और राजा ने घोसना करवाई की राजकुमारी को एक दिव्य पलंग पर और भव्य कमरे मेँ रखा जाए और इधर वह पारी जो राजकुमारी को बचाना चाहती थी| आई और जादुई छड़ी को घुमाते हुए कहा -” सोने दो उसे जो हे राजकुमारी के साथ उठाएगा जब उसे कोई राजकुमार तब सब पकड़ेंगे उसका हाँथ ” और ऐसा कहते ही जो प्राणी जहां था वही रुक गया और हर तरफ शांति हो गयी।

सभी पत्थर की मूरत के सामान जम गए। और फिर कई सो साल बीत गए उनके राज्य को जंगलो ने धक लिया। और फिर एक दिन एक सुन्दर राजकुमार भटकते हुए उधर आ पंहुचा। राजकुमार ने जब उस राज कुमारी को देखा तो वह उसके रूप पर मोहित हो गया।

उसने मन ही मन राजकुमारी की प्रस्सनशा की और उसके नरम हाथो को चुमलिया। राजकुमार के द्वारा राजकुमारी को चूमते ही पूरा राज्य वापस वैशा ही हो गया जैसे पहले था और राजकुमारी को भी होश आ गया। राजा ने इस दिन को एक पर्व और उत्सव की तरह मनाया और उन्दोनो का विवाह कर दिया। राजकुमार व राजकुमाई सुखी सुखी वही रहने लगे।

खेल खेल में

pari ki kahani

एक बार की बात है एक लड़का जिसका उसकी माँ के सिवाए इस धरती पर कोई नही था। अपने रूम में बिस्तर पर लेटा हुआ अपने स्वर्गवासी पिता के बारे में सोच रहा था। अचानक उसके कमरे की खिड़की पर बिजली चमकी। वह घबराकर उठ गया। उसने देखा कि खिड़की के पास एक व्यक्ति हवा में उड़ रहा है। उस व्यक्ति को देख कर लड़का डर गया किन्तु उसने हिम्मत करके

उस व्यक्ति से कहा- “कौन है आप”

वह व्यक्ति खिड़की के पास आ कर बोला – ” डरोमत” में तुम्हारा पिता हूँ। तुम बहुत अच्छे लड़के हो। इसलिए मैं तुमसे मिलने आया हूँ। बचे ने अपने पिता को देखा तो वह बहुत खुश हुआ। काफी समय तक वे दोनों आपस में बात करते रहे। और जाते जाते उसके पिता ने उसे…..

एक जादुई छड़ी देते हुए कहा-

“ये जादू की छड़ी है। तुम इसे जिस भी चीज की तरफ मोड़कर दो बार घुमाओगे वह चीज गायब हो जाएगी। अगले ही दिन लड़का वह छड़ी अपने स्कूल ले गया।

वहां उसने मस्ती करना शुरू किया। लड़के ने स्कूल में भी टीचर की किताब गायब कर दी फिर कई बच्चों की रबर और पेंसिलें भी गायब कर दीं। किसी को भी पता न चला कि यह लड़के की छड़ी की करामात है।

जब वह घर पहुंचा तब भी उसकी शरारतें बंद नहीं हुईं। लड़के को इस खेल में बड़ा मजा आ रहा था। किचन के दरवाजे के सामने एक कुर्सी रखी थी।

लड़के ने सोचा- क्यों न मैं इस कुर्सी को गायब कर दूं। जैसे ही उसने छड़ी घुमाई वैसे ही लड़के की मां किचन से बाहर निकलकर कुर्सी के सामने से गुजरी और कुर्सी की जगह उसकी मां गायब हो गई।

लड़का घबरा गया और रोने लगा। इतने में उसके सामने वह व्यक्ति आगया । लड़के ने अपने पिता को सारी बात बताई। व्यक्ति ने लड़के से कहा, मैं तुम्हारी मां को वापस ला सकता हूं, लेकिन उसके बाद मैं तुमसे ये जादू की छड़ी की वापस ले लूंगा।

लड़कारोते हुए बोला, आप जो भी चाहिए ले लो, लेकिन मुझे मेरी मां वापस ला दो। तब व्यक्तिने एक जादुई मंत्र पढ़ा और देखते ही देखते लड़के की मां वापस आ गई।

लड़के ने मुड़कर व्यक्ति का शुक्रिया कहना चाहा, लेकिन तब तक व्यक्तिबहुत दूर बादलों में जा चूका था। लड़का अपनी मां को वापस पाकर बहुत खुश हुआ और दौड़कर गले से लग गया।

जादू की छड़ी

जादू की छड़ी

एक रात की बात है शालू अपने बिस्तर पर लेटी थी। अचानक उसके कमरे की खिडकी पर बिजली चमकी। शालू घबराकर उठ गई। उसने देखा कि खिडकी के पास एक बुढिया हवा मे उड़ रही थी।

बुढ़िया खिडकी के पास आइ और बोली- “शालू तुम मुझे अच्छी लड़की हो। इसलिए मैं तुम्हे कुछ देना चाहती हूँ।” शालू यह सुनकर बहुत खुश हुई।

बुढिया ने शालू को एक छड़ी देते हुए कहा- “शालू ये जादू की छड़ी है। तुम इसे जिस भी चीज की तरफ मोड़ कर दो बार घुमाओगी वह चीज गायब हो जाएगी।” अगले दिन सुबह शालू वह छड़ी अपने स्कूल ले गई। वहा उसने शैतानी करना शुरू किया।

उसने पहले अपने समने बैठी लड़की की किताब गायब कर दी फिर कइ बच्चों की रबर और पेंसिलें भी गायब कर दीं। किसी को भी पता न चला कि यह शालू की छड़ी की करामात है।

जब वह घर पहुँची तब भी उसकी शरारतें बंद नही हुई। शालू को इस खेल में बडा मजा आ रहा था। रसोई के दरवाजे के सामने एक कुरसी रखी ती।

उसने सोचा- “क्यों न मै इस कुरसी को गायब कर दूँ। जैसे ही उसने छडी घुमाई वैसे ही शालू की माँ रसोइ से बाहर निकल कर कुरसी के सामने से गुजरीं और कुरसी की जगह शालू की माँ गायब हो गईं।

शालू बहुत घबरा गई और रोने लगी। इतने ही में उसके सामने वह बुढिया पकट हुई। शालू ने बुढिया को सारी बात बताई।

बुढिया ने शालू से कहा- “ मै तुम्हारी माँ को वापस ला सकती हू लेकिन उसके बाद मै तुमसे ये जादू की छडी वापस ले लूगी।”

शालू बोली “तुम्हे जो भी चाहिए ले लो लेकिन मुझे मेरी माँ वापस ला दो।” तब बुढिया ने एक जादुई मंत्र पढ़ा और देखते ही देखते शालू की माँ वापस आ गई।

शालू ने मुड़ कर बुढ़िया का शुक्रिया अदा करना चाहा लेकिन तब तक बुढ़िया बहुत दूर बादलों में जा चुकी थी। शालू अपनी माँ को वापस पाकर बहुत खुश हुई और दौडकर गले से लग गई।

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