Kahaniya in Hindi

Bhoot ki Kahani | Bhoot ki kahaniyan bhoot ki kahani

मेरे प्रिय मित्रों आज मैं जो कहानी(kahani hindi) आपके लिए लेकर आया हूं, वह सच्ची घटना पर आधारित है। चलो पढ़ते हैं एक सच्ची भूतिया कहानी( bhutiya kahani ),bhoot ki kahani

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जादुई आग

भूत-प्रेत की किस्से और कहानी तो आपने बहुत सुनी होगी, लेकिन बुलंदशहर में आजकल एक परिवार भूत-प्रेत की आग लगा देने वाली घटनाओं का शिकार हो रहा है। यहाँ एक घर में बीते 10 दिनों से रह-रहकर जादुई आग लगती है और बुझाने पर खत्म हो जाती है। हालात इतने बदतर है कि घर का कीमती सामान रूपया-पैसा सबकुछ इस आग में जलकर खाक हो चुका है। लेकिन इस जादुई आग का रहस्य अभी तक कोई नही पकड़ पाया है।

पहासू थाना क्षेत्र के गांव नगलिया टक्कर में एक घर में रहस्यमयी आग ने घर में सब कुछ खाक किया दिया। लोगों का कहना है कि न कोई दिखता है और न कोई घर में आग लगाता है, लेकिन घर में धू-धू कर अपने आप आग लग जाती है और घर में रखा समान जलने लगता है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 10 दिन से यह जादुई आग लग रही है।

बता दे कि चूड़ी बेचकर अपने परिवार का गुजारा करने वाले राजवीर लंबे वक्त से मनिहार का काम करते है। उसके घर में पिछले 10 दिन से जादुई आग लग रही है जिसकी लपट में उसके घर का सारा सामन आ चुका है। राजवीर ने बताया कि उसके घर में रखी चूडियां भी आग की लपटों में जल गयी।

बताया कि ऐसा कोई भी सामान अब बाकी नही है जिस पर आग की कालिख बरकरार न हो। घर का पंखा, कूलर, डिब्बे, अलमारी यहाँ तक कि भगवान की तस्वीरों तक को इस भयानक आग ने नही छोड़ा। ये आग कब, कहाँ और कैसे लगेगी, कोई नही जानता। आग लगाने वाला न तो दिखता है और न ही उसकी आमद की आहट सुनाई देती है। बस एकाएक आग लगती है और घर का कोई कोना या कीमती सामान जल उठता है।

हालात इतने बदतर है कि अब घर में न तो खाने-पीने के लिए कोई सामान बचा है और न ही रूपया-पैसा। घर के कमरे में रखी अलमारी में परिवार की बचत का कुछ पैसा रखा था, न ताला टूटा और न ताला खुला, बस आग लग गयी और सारा रूपया जलकर राख हो गया।

बताया गया है कि घर के मालिक राजवीर के बड़े बेटे नागेन्द्र की शादी के डेढ़ साल बाद उसकी पत्नी पिंकी 15 साल पहले रहस्यमयी हालत में मर गयी। पूरे परिवार को इस मामले में जेल भी हुई। जेल से वापिस आने के बाद राजवीर ने नागेन्द्र की दूसरी शादी कर दी। लेकिन नागेन्द्र की दूसरी पत्नी वीना को भी रहस्यमयी बीमारियों ने घेर लिया।

बीना से पैदा नागेन्द्र का ढाई साल का बेटा भी इसी तरह की रहस्यमय बीमारी में मौत का शिकार बना और राजवीर का भाई प्रह्लाद भी बिना किसी रोग और दिक्कत के चल बसा। उन्ही दिनों एक बार घर में जादुई आग लगी तो तांत्रिकों से उसका इंतजाम करवा लिया। तांत्रिकों ने बताया कि पिंकी की आत्मा घर में सबको परेशान कर रही है। घर के लोगो ने पिंकी को यह कहते सपने में भी सुना है कि वह पूरे परिवार का सर्वनाश कर देगी।

ग्रामीण राजकुमार, सोहनपाल ने बताया कि राजवीर के घर में अपने आप आग लगने का किस्सा सुना तो हेरान रहे गए, लेकिन घर जाकर देखा तो राजवीर के घर का सारा समान जल कर खाक हो चुका था। ग्रामीणों ने बताया किसी को भी नहीं पता की राजवीर के घर में बीते 10 दिनों से कौन आग लगा रहा है। कुछ ग्रामीणी तो आग लगने की घटनाओं को भूत और प्रेत का चक्कर मान रहे तो कुछ इस अपने आप लगाई गयी आग बता रहे है।

तन्त्र-मंत्र, भूत-प्रेत और रहस्यमयी आत्माओं के किस्से-कहानियां छोटे और बड़े परदे पर खूब दिखते है। ऐसी चीजों के अस्तित्व को विज्ञान नही मानता। लेकिन सवाल यह कि अगर ऐसा नही है तो पल-पल लगने वाली इस आग का रहस्य क्या है। तांत्रिकों की क्रियाओं से आखिर कैसे आग का प्रकोप रूक जाता है। घर में एक के बाद एक तीन लोगो की मौत सामान्य है या उसका भी कोई रहस्य है। कौन है जो आग लगाता है और पूरे परिवार का सर्वनाश करने पर तुला हुआ है। शायद विज्ञान के पास इस सवालों के भी जबाब हो।

पीपलवाला भूत

हमारे गाँव के एक बाबूसाहब पेटगड़ी (पेट का दर्द) से परेशान थे । उनकी पेटगड़ी इतनी बड़ गई कि उनके जान की बन गई। बहुत सारी खरविरउआ दवाई कराई गई; मन्नतें माँगी गई, ओझाओं-सोखाओं को अद्धा, पौवा के साथ ही साथ भाँग-गाँजा और मुर्गे, खोंसू (बकरा) भी भेंट किए गए पर पेटगड़ी टस से मस नहीं हुई। उसी समय हमारे गाँव में कोई महात्मा पधारे थे और उन्होनें सलाह दी कि अगर बाबूसाहब को सौ साल पुराना सिरका पिला दिया जाए तो पेटगड़ी छू-मंतर हो जाएगी। अब क्या था, बाबूसाहब के घरवाले, गाँव-गड़ा, हितनात सब लोग सौ साल पुराने सिरके की तलाश में जुट गए। तभी कहीं से पता चला कि पास के गाँव सिधावें में किसी के वहाँ सौ साल पुराना सिरका है।

​अब सिरका लाने का बीड़ा बाबूसाहब के ही एक लँगोटिया यार श्री खेलावन अहिर ने उठा लिया । साम के समय खेलावन यादव सिरका लाने के लिए सिधावें गाँव में गए। (सिधावें हमारे गाँव से लगभग एक कोस पर है) खेलावन यादव सिरका लेकर जिस रास्ते से चले उसी रास्ते में एक बहुत पुराना पीपल का पेड़ था और उसपर एक नामी भूत रहता था। उसका खौफ इतना था कि वहाँ बराबर लोग जेवनार चढ़ाया करते थे ताकि वह उनका अहित न कर दे। अरे यहाँ तक कि वहाँ से गुजरनेवाला कोई भी व्यक्ति यदि अंजाने में सुर्ती बनाकर थोंक दिया तो वह भूत ताली की आवाज को ललकार समझ बैठता था और आकर उस व्यक्ति को पटक देता था। लोग वहाँ सुर्ती, गाँजा, भाँग आदि चढ़ाया करते थे।

​अभी खेलावन अहिर उस पीपल के पेड़ से थोड़ी दूर ही थे तब तक सिरके की गंध से वह भूत बेचैन हो गया और सिरके को पाने के लिए खेलावन अहिर के पीछे पड़ गया। खेलावन अहिर भी बहुत ही निडर और बहादुर आदमी थे, उन्होंने भूत को सिरका देने की अपेक्षा पंगा लेना ही उचित समझा। दोनों में धरा-धरउअल, पटका-पटकी शुरु हो गई। भूत कहता था कि थोड़ा-सा ही दो लेकिन दो। पर खेलावन अहिर कहते थे कि एक ठोप (बूँद) नहीं दूँगा; तूझे जो करना है कर ले। अब भूत अपने असली रूप में आ गया और लगा उठा उठाकर खेलावन यादव को पटकने पर खेलावन यादव ने भी ठान ली थी कि सिरका नहीं देना है तो नहीं देना है। पटका-पटकी करते हुए खेलावन अहिर गाँव के पास आ गए पर भूत ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और वहीं एक छोटे से गढ़हे में ले जाकर लगा उनको गाड़ने। अब उस भूत का साथ देने के लिए एक बुढ़ुआ (जो आदमी पानी में डूबकर मरा हो) जो वहीं पास की पोखरी में रहता था आ गया था। अब तो खेलावन यादव कमजोर पड़ने लगे। तभी क्या हुआ कि गाँव के कुछ लोग खेलावन यादव की तलाश में उधर ही आ गए तब जाकर खेलावन यादव की जान बची।

​दो-तीन बार सिरका पीने से बाबूसाहब की पेटगड़ी तो एक-दो दिन में छू-मंतर हो गई पर खेलावन अहिर को वह पीपलवाला भूत बकसा नहीं अपितु उन्हें खेलाने लगा। बाबूसाहब ताजा सिरका बनवाकर और सूर्ती, भाँग आदि ले जाकर उस पीपल के पेड़ के नीचे चढ़ाए और उस भूत को यह भी वचन दिया कि साल में दो बार वे जेवनार भी चढ़ाएँगे पर तुम मेरे लँगोटिया यार (खेलावन यादव) को बकस दो। पीपलवाले भूत ने खेलावन यादव को तो बकस दिया पर जबतक बाबूसाहब थे तबतक वे साल में दो बार उस पीपल के पेड़ के नीचे जेवनार जरूर चढ़ाया करते थे।

​उस पीपल के पेड़ को गिरे लगभग 20-25 साल हो गए हैं और वहीं से होकर एक पक्की सड़क भी जाती है पर अब वह भूत और वह पीपल केवल उन पुरनिया लोगों के जेहन में है जिनका पाला उस भूत से पड़ा।

​सिरका चाहें आम का हो या कटहल का या किसी अन्य फल का पर यह वास्तव में पेट के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है और जितना पुराना होगा उतना ही बढ़िया।

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